भूमि फर्जीवाड़ा केस में खेतसिंह मेड़तिया और सुरेश कुमार सिद्धार्थ गिरफ्तार, सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत रद्द होने के बाद किया सरेंडर
करोड़ों रुपये के कथित भूमि फर्जीवाड़े का मामला; दोनों आरोपियों ने मीरा-भायंदर कोर्ट में किया सरेंडर, काशीमीरा पुलिस ने हिरासत में लिया
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Rohit Thakur
करोड़ों रुपये के कथित भूमि फर्जीवाड़े और जालसाजी के मामले में सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत रद्द होने के बाद आरोपी खेतसिंह तख्तसिंह मेड़तिया और सुरेश कुमार सिद्धार्थ ने बुधवार को मीरा-भायंदर कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। सरेंडर के बाद काशीमीरा पुलिस ने दोनों आरोपियों को अपनी हिरासत में ले लिया। बताया जा रहा है कि पुलिस दोनों आरोपियों को गुरुवार को स्थानीय अदालत में पेश कर पुलिस कस्टडी रिमांड की मांग करेगी। जांच एजेंसी का मुख्य उद्देश्य मामले से जुड़े महत्वपूर्ण मूल दस्तावेजों को बरामद करना और कथित भूमि फर्जीवाड़े के पूरे नेटवर्क की जांच करना है। सुप्रीम कोर्ट ने 19 अगस्त को रद्द की थी अग्रिम जमानत यह मामला शिकायतकर्ता सोहन कंवर शिवराज सिंह की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका से जुड़ा है। याचिका में बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा 8 दिसंबर 2025 को दिए गए अग्रिम जमानत के आदेश को चुनौती दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ ने 19 अगस्त 2026 को मामले की सुनवाई करते हुए दोनों आरोपियों को मिली अग्रिम जमानत की राहत रद्द कर दी थी। अदालत ने मामले में हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता को महत्वपूर्ण माना और आरोपियों को स्थानीय ट्रायल कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था। जांच के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज अभी भी अहम सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया था कि चार्जशीट दाखिल होने के बावजूद मामले से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण मूल दस्तावेज अभी तक जांच एजेंसी को उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। इनमें वर्ष 1975 की कथित पावर ऑफ अटॉर्नी, 4 फरवरी 2025 का बिक्री समझौता और 25 अगस्त 2025 का डीड ऑफ कन्फर्मेशन जैसे दस्तावेज शामिल बताए गए हैं। शिकायतकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया कि आरोपियों ने पूर्व में मिली जमानत की राहत का कथित तौर पर दुरुपयोग करते हुए फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर जमीन की बिक्री से संबंधित एक और आपराधिक कृत्य किया। 1813.62 वर्ग मीटर जमीन से जुड़ा मामला मामला नया नगर पुलिस स्टेशन में दर्ज अपराध क्रमांक 336/2025 से संबंधित है। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत जालसाजी और धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है। अभियोजन के अनुसार, करीब 1813.62 वर्ग मीटर अचल संपत्ति पर कथित रूप से फर्जी दावा करने के उद्देश्य से कूट रचित दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। पुलिस के अनुसार, मामले में वर्ष 1975 की कथित पावर ऑफ अटॉर्नी, वर्ष 2005 की कथित जाली पावर ऑफ अटॉर्नी तथा 31 अगस्त 2007 के बिक्री सह विकास समझौते से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है। आरोप है कि इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर एमनेस्टी योजना के तहत 4 फरवरी 2025 को बिक्री समझौता और 25 अगस्त 2025 को डीड ऑफ कन्फर्मेशन पंजीकृत कराया गया। पुलिस रिमांड में होगी पूछताछ फिलहाल मामले की जांच काशीमीरा पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक राजेंद्र कांबले के नेतृत्व में की जा रही है। पुलिस द्वारा आरोपियों से हिरासत में पूछताछ कर महत्वपूर्ण दस्तावेजों की बरामदगी, दस्तावेजों की सत्यता और कथित आपराधिक नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच किए जाने की संभावना है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार पुलिस हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता पूरी होने और आरोपियों के न्यायिक हिरासत में जाने के बाद वे नियमित जमानत के लिए आवेदन कर सकेंगे। नियमित जमानत पर फैसला ट्रायल कोर्ट द्वारा मामले के गुण-दोष के आधार पर किया जाएगा।

