महासभा में हंगामे के बीच 688 करोड़ के प्रस्ताव मंजूर
भूमिगत सीवरेज के लिए 500 करोड़ और मल-जल शोधन केंद्र के लिए 188 करोड़ का प्रावधान
भाईंदर। मीरा-भाईंदर महानगरपालिका की शुक्रवार को हुई महासभा में जोरदार हंगामे और मारपीट की घटना के बीच सत्ताधारी भाजपा ने करीब 688 करोड़ रुपये के विकास कार्यों से जुड़े प्रस्तावों को मंजूरी दे दी। इनमें भूमिगत सीवरेज योजना के दूसरे चरण के लिए करीब 500 करोड़ रुपये तथा मल-जल शोधन केंद्र की देखभाल, मरम्मत और पुनर्निर्माण के लिए 188 करोड़ रुपये के प्रस्ताव शामिल हैं। इन बड़े आर्थिक प्रस्तावों पर पर्याप्त चर्चा नहीं होने को लेकर विपक्षी नगरसेवकों ने सवाल उठाए हैं।
महासभा के दौरान चित्रीकरण किए जाने के संदेह को लेकर भाजपा नगरसेवकों और दर्शक दीर्घा में मौजूद नागरिकों तथा पत्रकारों के बीच विवाद हो गया। विवाद बढ़ने के बाद मारपीट की स्थिति पैदा हो गई और सभागृह में भारी हंगामा हुआ। इस मामले में करीब 16 नगरसेवकों के खिलाफ भाईंदर पुलिस थाने में मामला दर्ज किए जाने की जानकारी है। वहीं, नगरसेवकों और महानगरपालिका प्रशासन की शिकायतों के आधार पर कुछ नागरिकों के खिलाफ भी मामले दर्ज किए गए हैं।
महासभा में हंगामा शुरू होने से पहले ही कामकाज जल्द पूरा करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी। नवरात्रि के कार्यक्रमों में शामिल होने का हवाला देते हुए महासभा का कामकाज जल्दी समाप्त करने की भूमिका महापौर की ओर से अपनाई गई। इसके चलते लक्षवेधी सूचना और प्रश्नोत्तर का समय भी नहीं लिया गया।

महासभा की विषय सूची में करीब 32 विषय शामिल थे। इनमें से कई विषयों को एक साथ चर्चा के लिए लेकर तेजी से मतदान कराया गया। इसी प्रक्रिया के दौरान करोड़ों रुपये के महत्वपूर्ण विकास कार्यों से जुड़े प्रस्तावों को भी मंजूरी दे दी गई।
भूमिगत सीवरेज योजना के दूसरे चरण के लिए करीब 500 करोड़ रुपये के खर्च का प्रस्ताव मंजूर किया गया। इसके अलावा मल-जल शोधन केंद्र की देखभाल, मरम्मत और पुनर्निर्माण के लिए 188 करोड़ रुपये के खर्च को भी मंजूरी दी गई। दोनों प्रस्तावों की कुल राशि करीब 688 करोड़ रुपये है।
इतनी बड़ी राशि वाले प्रकल्पों को मंजूरी देने से पहले उनकी आवश्यकता, तकनीकी पहलुओं, काम की गुणवत्ता और भविष्य की योजना पर विस्तृत चर्चा होना आवश्यक माना जाता है। हालांकि, विपक्ष का आरोप है कि महासभा में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर सदस्यों को पर्याप्त चर्चा का अवसर नहीं दिया गया और बहुमत के आधार पर प्रस्तावों को मंजूरी दे दी गई।
महासभा में इसके अलावा परिवहन बस सेवा के किराए में बढ़ोतरी, सूर्या जलापूर्ति योजना के तहत वितरण व्यवस्था तैयार करना, पंपिंग हाउस की देखभाल और मरम्मत, अधिकारियों की पदोन्नति तथा सूखा प्रभावित किसानों को आर्थिक सहायता देने जैसे विषयों पर भी निर्णय लिए गए।
कांग्रेस के नगरसेवकों ने महासभा का कामकाज जल्दबाजी में निपटाए जाने पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि महीने में लगभग एक बार होने वाली महासभा में करोड़ों रुपये के विकास कार्यों से जुड़े प्रस्तावों पर सदस्यों को विस्तार से चर्चा करने का पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए। महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर सवाल पूछने और आवश्यक सुधार सुझाने का अधिकार भी सदस्यों को मिलना जरूरी है।
वहीं, भाजपा के गुटनेता हसमुख गेहलोत ने महासभा का काम जल्द निपटाए जाने के आरोप को खारिज किया। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक काम समय पर पूरे हों और नागरिकों से जुड़े कार्यों में अनावश्यक देरी न हो, इसी उद्देश्य से विषयों पर तेजी से निर्णय लिए जा रहे हैं।
महासभा में हुई मारपीट और उसके बाद दर्ज हुए मामलों के कारण राजनीतिक माहौल भी गरमा गया है। एक तरफ करोड़ों रुपये के विकास कार्यों को मंजूरी दी गई है, तो दूसरी तरफ इन प्रस्तावों पर पर्याप्त चर्चा नहीं होने को लेकर विपक्ष ने सवाल खड़े किए हैं। अब मंजूर किए गए इन बड़े प्रकल्पों की निविदा प्रक्रिया, खर्च और काम की गुणवत्ता पर सभी की नजर रहेगी।

